परदेस से आये थे यार मेरे, ज़रा हम से भी मिल लेते
कुछ लम्हे हम भी जीते संग, कुछ यादें ही बुन लेते,
कुछ सुनते तुम्हारी भी, कुछ अपनी भी कह लेते
कुछ हस्ते तुम्हारे साथ, कुछ थोडा हम रो लेते ,
परदेस से आये थे यार मेरे, ज़रा हम से भी मिल लेते,
भाभी इतनी अच्छी थी, प्यारी सी उनकी दो बच्ची थी,
मन कुछ न हो मगर, बच्चो को ज़रा प्यार ही हम कर लेते
सोचा करते थे मिलेंगे कभी, सुनेंगी हमारी कहानी भी,
वक़्त के दो पल ही तोह मांगे थे, वोह नाम हमारे देते,
परदेस से आये थे यार मेरे, ज़रा हम से भी मिल लेते
दोस्त फिर भी कोई ग़म नहीं, बस दिल मैं एक ही इच्छा थी,
जीवन मैं कब क्या घाट ता है, उसकी होती कभी खबर नहीं
जीवन मैं कुछ होने से पहले, मिल कर हम हास लेते,
परदेस से आये थे यार मेरे, ज़रा हम से भी मिल लेते
जा खुश रह यार मेरे, चुह इस दुनिया की बुलंदी को,
पअ ले सब जो तुने सोच अ है, और ऐश उड़ा तुह यार मेरे,
पर जब तुझे लगे कुछ यूँ, के ग़म हो आस पास तेरे
डरना नहीं, हिचकिचाना नहीं, याद कर लेना दोस्त मेरे,
मैं नहीं कहूँगा तुझको की, परदेस मैं है तू यार मेरे,
वरना हम भी कुछ कर लेते.....!!
परदेस से आये थे यार मेरे, ज़रा हम से भी मिल लेते, ज़रा हम से भी मिल लेते..........
Sunday, April 3, 2011
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